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42 महीने में सबसे ज्यादा बढ़ी थोक महंगाई दर,ईरान संकट ने बिगाड़ा भारत का बजट

42 महीने में सबसे ज्यादा बढ़ी थोक महंगाई दर,ईरान संकट ने बिगाड़ा भारत का बजट

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान संकट का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है,अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर यानी WPI Inflation 42 महीने के सबसे ऊंचे स्तर 8.3% पर पहुंच गई। मार्च में यह आंकड़ा 3.88% था, यानी मार्च से अप्रैल मे 113.18% बढ़ोतरी है!

सबसे ज्यादा असर ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में देखने को मिला है। पेट्रोल, डीजल और LPG जैसी रोजमर्रा की जरूरतें महंगी होने लगी हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ गया है।

क्यों बढ़ी महंगाई?

विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz ) में बाधा के कारण भारत के लिए कच्चे तेल का आयात महंगा हो गया है। दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगी आग ने भारत में ईंधन लागत बढ़ा दी।

सरकार के मुताबिक, अप्रैल में खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, धातु और अन्य विनिर्माण उत्पादों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई, उसी वजह से WPI Inflation रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

42 महीने में सबसे ज्यादा WPI Inflation

अप्रैल 2026 का 8.3% WPI Inflation पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज ने कहा कि थोक महंगाई में इतनी तेज मासिक बढ़ोतरी इस सीरीज में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।

कहां कितनी बढ़ी महंगाई?

ईंधन और बिजली

  • अप्रैल में ईंधन और बिजली श्रेणी की महंगाई दर 24.71% पहुंच गई
  • मार्च में यही आंकड़ा केवल 1.05% था

कच्चा पेट्रोलियम

  • क्रूड पेट्रोलियम महंगाई दर अप्रैल में 88.06% रही
  • यह अक्टूबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है

पेट्रोल और डीजल

  • पेट्रोल महंगाई दर: 32.40%
  • डीजल महंगाई दर: 25.19%

LPG सिलेंडर

  • LPG में महंगाई दर अप्रैल में 10.92% रही
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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी असर

महंगाई का असर अब फैक्ट्रियों और उद्योगों पर भी दिखने लगा है। विनिर्मित उत्पादों में अप्रैल में महंगाई दर 4.62% रही, जो मार्च में 3.39% थी,अलग शब्दो मे कहे तो 36.28% की बढ़ोतरी हुए है!

इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई:

  • खाद्य उत्पाद: 2.90%
  • बुनियादी धातुएं: 7%
  • रसायन: 5.09%
  • वस्त्र: 7.30%

खाने-पीने की चीजों में क्या हुआ?

हालांकि राहत की बात यह रही कि सब्जियों और फलों की महंगाई में थोड़ी कमी देखने को मिली।

  • सब्जियों की महंगाई: 0.53%
  • फलों की महंगाई: -0.21%
  • अनाज महंगाई: -0.29%

लेकिन WPI Food Index मार्च के 1.85% से बढ़कर अप्रैल में 2.31% पहुंच गया।

मई में 9% पार कर सकती है महंगाई!

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो मई 2026 में WPI Inflation 9% के पार जा सकती है।

यानी आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा के कई सामान और महंगे हो सकते हैं

Opinion

पश्चिम बंगाल के चुनाव की राजनीति खत्म होते ही अब देश की जनता महंगाई की आग में जलने लगे,आज सुबह पेट्रोल डीजल ₹3 से महंगा कर दिया गया गैस सिलेंडर पहले से महंगा बिजली महंगी है रोजमर्रा के समान तो जैसे लग रहा आम आदमी के पहुंचे बाहर होते जा रहा है ऐसे में सवाल यह है कि क्या चुनावी राजनीति के बीच जनता की आर्थिक हालात सरकार की प्राथमिकता से बाहर हो चुकी है

थोक मुद्रास्फीति 42 महीने में सबसे ऊपर चला गया, यह उस दबाव की कहानी है, जो हर मध्य वर्ग और गरीब परिवार को झेलना पड़ेगा, सरकार वैश्विक संकट ईरान युद्ध का हवाला दे रही है, लेकिन सब जनता पूछ रही है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता था, तब जनता को राहत क्यों नहीं मिली तब आप मुनाफा वसूली क्यों करते रहे.

आप बेशक राजनीति जीत का जश्न मनाइये,लेकिन यह जश्न तब तक अधूरा है, जब तक आम आदमी की रसोई सुरक्षित ना हो, जब तक आम गरीब आदमी का थाली में रोटी सुरक्षित ना हो, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहले ही बता दिया था कि जैसे ही चुनाव खत्म होंगे,महंगाई की बम फूटेगा वही आज देश की जनता देख रही और झेल रही है, तो जनता आपसे पूछ रही है कि क्या देश चुनावी नारों से चलेगा या आर्थिक राहत से?

आज का सबसे बड़ा सवाल यही है:-

क्या सरकार जनता को आत्मनिर्भर बना रही है या महंगाई की बोझ तले आत्म समर्पण करने को मजबूर कर रही है?

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