आजकल हर फ्यूल स्टेशन और सोशल मीडिया ग्रुप्स में एक ही चर्चा है— ‘E20 पेट्रोल’। कई वाहन मालिक यह शिकायत कर रहे हैं कि नए पेट्रोल से उनकी गाड़ी का माइलेज अचानक कम हो गया है, जबकि कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि इससे पुरानी गाड़ियों के इंजन बर्बाद हो रहे हैं। लेकिन क्या इन बातों में कोई सच्चाई है या यह सिर्फ एक अफवाह है? आइए विस्तार से समझते हैं।
E20 पेट्रोल आखिर क्या है? E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पारंपरिक पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक बायोफ्यूल है जिसे गन्ने, मक्के और चावल जैसी फसलों से बनाया जाता है।
क्या सच में कम हो रहा है माइलेज? हाँ, यह सच है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज कुछ हद तक कम होता है, लेकिन 30% तक गिरने का दावा गलत है। दरअसल, यह कोई खराबी नहीं बल्कि विज्ञान है। इथेनॉल की ‘कैलोरिफिक वैल्यू’ (ऊर्जा पैदा करने की क्षमता) पेट्रोल के मुकाबले कम होती है। इसका मतलब है कि इंजन को उतनी ही पावर पैदा करने के लिए थोड़ा ज्यादा ईंधन जलाना पड़ता है।
रियल-वर्ल्ड टेस्टिंग के अनुसार, पुरानी पेट्रोल कारों और दोपहिया वाहनों के माइलेज में 5 से 12 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी स्पष्ट किया है कि इथेनॉल के कारण माइलेज पर ‘मामूली’ (marginal) असर पड़ सकता है, खासकर शहर के स्टॉप-एंड-गो ट्रैफिक में।
क्या E20 से पुरानी गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं? सोशल मीडिया पर इंजन डैमेज को लेकर फैलाई जा रही बातें पूरी तरह से भ्रामक हैं। नितिन गडकरी जी ने इन अफवाहों को “झूठा नैरेटिव” करार दिया है और कहा है कि E20 की वजह से किसी भी गाड़ी के खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों (SIAM, ARAI) और सर्विस डेटा ने भी इसकी पुष्टि की है कि E20 से अचानक इंजन फेल होने का कोई खतरा नहीं है।
हालांकि, जो गाड़ियां 2023 से पहले (Pre-2023) बनी हैं, वे 20% इथेनॉल के लिए पूरी तरह से ऑप्टिमाइज़ नहीं हैं। लंबे समय में, इथेनॉल की नमी सोखने की प्रवृत्ति के कारण पुराने इंजनों के रबर सील, फ्यूल लाइन और होज़ (hoses) पर थोड़ा असर पड़ सकता है। यह कोई बड़ा इंजन डैमेज नहीं है। सर्विसिंग के दौरान कंपनियों को पुराने मेटल वॉशर की जगह नए रबर वॉशर मुफ्त या मामूली कीमत पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे इस समस्या से बचा जा सकता है।
भारत सरकार E20 पेट्रोल को क्यों बढ़ावा दे रही है? जब माइलेज थोड़ा कम हो रहा है, तो सरकार इसे लागू ही क्यों कर रही है? इसके पीछे देशहित के तीन बड़े कारण हैं:
- आयात पर निर्भरता में कमी: भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.5% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इथेनॉल ब्लेंडिंग के जरिए 2014-15 से अब तक देश ने 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है।
- किसानों को फायदा: इस योजना से देश के किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त कमाई हुई है।
- पर्यावरण सुरक्षा: E20 के इस्तेमाल से भारत ने लगभग 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन (CO2) को कम किया है।
वाहन मालिकों के लिए टिप्स: अगर आपके पास 2023 से पहले की गाड़ी है और आप E20 फ्यूल का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो घबराएं नहीं। अपनी गाड़ी की समय पर सर्विसिंग कराएं। आप अच्छी क्वालिटी के फ्यूल एडिटिव्स (Fuel Additives) का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जो इथेनॉल को स्थिर रखते हैं, इंजेक्टर को साफ रखते हैं और इंजन को जंग से बचाकर माइलेज को बनाए रखने में मदद करते हैं।
E20 पेट्रोल भविष्य की जरूरत है। नई गाड़ियां (2023 के बाद की) इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं, और पुरानी गाड़ियां भी थोड़ी सावधानी के साथ इस पर सुरक्षित रूप से चल सकती हैं













