Pahalgam attack:जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पहलगाम में पिछले साल हुआ आतंकी हमला एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह बनी है NIA यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट, जिसमें कई ऐसे खुलासे हुए हैं जो लोगों को हैरान भी कर रहे हैं और गुस्सा भी दिला रहे हैं।
एनआईए का दावा है कि अगर समय रहते सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दे दी जाती, तो 26 मासूम पर्यटकों की जान बच सकती थी। सबसे बड़ा सवाल उन स्थानीय लोगों पर उठ रहा है, जिन पर आतंकियों को शरण देने का आरोप लगा है।
कौन था Pahalgam attack का मास्टरमाइंड?
चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरे हमले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा और TRF से जुड़ा आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट था। एजेंसी का कहना है कि पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर वह आतंकियों को लगातार निर्देश दे रहा था।
बताया गया है कि साजिद जट्ट रियल टाइम लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी आतंकियों तक पहुंचा रहा था, ताकि हमला सफल हो सके।
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3000 रुपये लेकर दी गई शरण?
एनआईए की जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह स्थानीय गाइडों की कथित भूमिका है।
चार्जशीट के अनुसार, हमले से एक दिन पहले तीन आतंकी — फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी — पहलगाम इलाके में छिपे हुए थे। आरोप है कि स्थानीय गाइड परवेज और बशीर अहमद ने उनकी मदद की।
जांच एजेंसी का दावा है कि बशीर अहमद ने अपनी झोपड़ी में आतंकियों को करीब पांच घंटे तक छिपाकर रखा। उन्हें खाना-पानी और आराम की सुविधा भी दी गई। इसके बदले आतंकियों ने कथित तौर पर 3000 रुपये दिए थे।
क्या समय रहते बच सकती थीं जानें?
एनआईए का कहना है कि हमले वाले दिन भी कुछ स्थानीय लोगों ने आतंकियों को देखा था, लेकिन इसकी जानकारी सुरक्षा बलों को नहीं दी गई।
कुछ ही घंटों बाद बैसरन घाटी में हमला हुआ और 26 पर्यटकों की मौत हो गई। कई परिवार हमेशा के लिए उजड़ गए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर उसी समय पुलिस या सेना को सूचना मिल जाती, तो क्या इतना बड़ा हमला रोका जा सकता था?
डर या आतंकी नेटवर्क?
जांच एजेंसी अब इस बात की तह तक जाने में लगी है कि स्थानीय लोगों ने आतंकियों की मदद डर की वजह से की या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
एनआईए फंडिंग, लोकल सपोर्ट सिस्टम और सीमा पार से मिलने वाले निर्देशों की भी जांच कर रही है। एजेंसी को शक है कि घाटी में आतंकियों की मदद के लिए एक पूरा लोकल नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
कई बड़े सवाल छोड़ गई चार्जशीट
इस चार्जशीट के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या कुछ पैसों के लिए आतंकियों को मदद दी गई?
क्या स्थानीय स्तर पर डर इतना ज्यादा है कि लोग सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देने से बचते हैं?
और सबसे बड़ा सवाल — क्या 26 लोगों की मौत रोकी जा सकती थी?
पहलगाम हमला सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं था, बल्कि यह सुरक्षा व्यवस्था, लोकल नेटवर्क और आतंकियों की रणनीति पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में एनआईए की जांच से और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।













