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भारत में सबसे ज्यादा घुसपैठिए कहां? टॉप-5 राज्यों के नाम जानकर चौंक जाएंगे!

पीएम मोदी के द्वारा दिए गए राज्यसभा मे बयान के बाद ही घुसपैठिए का मुद्दा केंद्र में आया है,ऐसे में सवाल यह है कि किस राज्य में कितने घुसपैठ है इसी क्रम में देश के पांच राज्यों के बारे में आपको जान लेना चाहिए!

क्या घुसपैठियों वाला मुद्दा अभी भी बीजेपी के पास है?

4 में 2026 को बंगाल चुनाव का परिणाम में आ गया, बीजेपी को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ, वैसे में एक सवाल यह बनता है, जो बीजेपी लगातार ममता सरकार पर ये आरोप लगा रही थी की ममता सरकार घुसपैठियों को पनाह देती है, और उसी घुसपैठियों की वोट की बदौलत ही ममता सरकार पश्चिम बंगाल में सत्ता में है, अब तो इस सवाल का कोई मतलब नहीं बनता!

सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं?

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट अनुसार केंद्र सरकार की ओर से तत्कालीन केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 2016 में संसद में हो रहे बहस के दौरान बताया था कि भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी की संख्या लगभग 2 करोड़ है, इससे पहले कांग्रेस की सरकार ने 2004 में इस संख्या को 1.2 करोड़ बताई थी, यह आंकड़ा सिर्फ बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों से ही जुड़े थे जबकि नेपाल,म्यांमार और अन्य सीमावर्ती देशों से आए लोगों को शामिल नहीं किया जाता था , लेकिन अभी 2026 की रिपोर्ट की माने तो यह संख्या बड़ी होने की आशंका जताई जा रही है!

पहला राज्य: पश्चिम बंगाल

जब कभी संसदीय चर्चाओं में घुसपैठियों की बात आती है तो पश्चिम बंगाल का नाम सबसे ऊपर आता है भारत बांग्लादेश की सीमा (4096.7 km) लंबी होने के कारण अवैध घुसपैठयो की चुनौती से निपटना सरकार के लिए एक बहुत बड़ा मुद्दा बना हुआ है, अलग-अलग रिपोर्ट और सरकारी अनुमान को माने तो यहां बिना दस्तावेज के रहने वालों की संख्या लगभग 57 लाख बताई जा रही है यही वजह है कि लगातार केंद्र सरकार और ममता सरकार के बीच आपस में टकराव बना रहता है.

दूसरा राज्य:असम

अगर असम की बात करें तो घुसपैठ का मुद्दा कई दशकों को पुराना है. एक लंबी सीमा बांग्लादेश के साथ साझा होने के कारण यहां का जनसंख्या संरचना में बदलाव एक बहुत बड़ी समस्या रही है और इसके लिए समय-समय पर आंदोलन भी होते रहे हैं, इसी कारण एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजंस की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी, इसके बाद करीब 19 लाख लोगों पर फर्जी नागरिक होने का सवाल खड़ा हुआ लेकिन अगर सरकारी आंकड़ा को समझे तो सरकार 50 लाख अवैध प्रवासी की संख्या बता रही है.

महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार

बंगाल से सटे होने के कारण बिहार में भी अवैध  प्रवासियों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है, महाराष्ट्र और दिल्ली सीमावर्ती राज नहीं होने के बावजूद भी अवैध घुसपैठ की पहचान की गई है, बेहतर रोजगार, बेहतर कमाई और बेहतर जीवन शैली जीने के लिए अवैध प्रवासी इन महानगरों में आकर बस जाते हैं

विचार

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मोदी सरकार पिछले 12 सालों से केंद्र की सत्ता में है,पश्चिम बंगाल जो अवैध घुसपैठियों की मुद्दों लेकर पीएम मोदी और अमित शाह लगातार हमला करती रही है,वहां भी अब बीजेपी की सरकार है,बिहार में भी बीजेपी की सरकार है,महाराष्ट्र में भी बीजेपी की सरकार है,असम में भी बीजेपी की सरकार है,और दिल्ली में भी बीजेपी की सरकार है, तो सभी संवेदनशील जगहों पर बीजेपी की सरकार है जहां घुसपैठिए का मुद्दा लगातार खबरों में बना रहता है,तो अब मेरा यह मानना है कि अब ये मुद्दा बिल्कुल खत्म हो जाना चाहिए क्योंकि बीजेपी जो चाहती थी कि वहां उनकी सरकार बने और अवैध घुसपैठियों  को वह निकल बाहर फेंकेगी!

तो सवाल यह है क्या बीजेपी यह कर पाएगी?